भारत की सांस्कृतिक धुरी: ब्राह्मण समाज का निष्पक्ष और ऐतिहासिक अवलोकन
भारत की सांस्कृतिक धुरी ब्राह्मण समाज का एक निष्पक्ष और ऐतिहासिक अवलोकन भारतीय समाज के ताने-बाने में गुंथी एक अदृश्य, फिर भी सशक्त धागा – ब्राह्मण समाज। सदियों से ज्ञान, आध्यात्म और परंपरा का वाहक रहा यह समुदाय, जिसने भारतीय सभ्यता को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस ब्लॉग में हम ब्राह्मण समाज के प्राचीन इतिहास, समृद्ध संस्कृति, बहुमुखी योगदान और वर्तमान चुनौतियों का एक संतुलित और संवेदनशील विश्लेषण करेंगे। 1. वैदिक काल से आज तक का सफर वैदिक काल में 'मुख से उत्पन्न' ब्राह्मण ज्ञान और वाणी के प्रतीक बने। कर्म और गुण के आधार पर भूमिकाएँ गतिशील थीं। उत्तर वैदिक काल में, व्यवस्था में दृढ़ता आई और मनुस्मृति का प्रभाव बढ़ा। "मौर्य, गुप्त और चोल कालों में सत्ता और संरक्षण का खेल चला। चाणक्य जैसे रणनीतिक सलाहकार इसी परंपरा की उपज थे।" ॐ परंपरा, अनुशासन और ज्ञान का अटूट संगम जो सदियों से बह रहा है। भारतीय सभ्यता के आध्यात्मिक और बौद्धिक संरक्षक 2 परंपराएँ और संस्कार ✦ षोडश संस्कार: गर्भाधान से अंत्येष्टि तक 16 महत्वपूर्ण पड़ाव। ✦ संध्यावंदनम्: सूर्य के तीन प्रहरों म...